types of a story | how to start a story | कहानी क्या है?


आज में आपको ये बताने जा रहा हु की कहानी क्या है?, how to start a story, types of a story,
हम बोहत सारी कहानिया पढ़ते है। लेकिन अगर पूछा जाये की कहानी के लक्ष्ण क्या है? हम कहानी किसे कहते है? तोफिर इसका जवाब जल्दी से नहीं दे पते है। तो आज जानते है की कहानी क्या है?

types of a story | how to start a story | कहानी क्या है?

types of a story | how to start a story | कहानी क्या है?

types of a story | how to start a story | कहानी क्या है?

 कहानी या कथा शब्द का शाब्दिक अर्थ है। "करना" इस अर्थ के अनुसार जो कुछ भी कहा जाए कहानी है। लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है। विशेष अर्थ में हम किसी विशेष घटना के रोचक ढंग से वर्णन को कहानी कहते हैं।

कहानी के स्वरूप को परिभाषित करने के अनेक प्रयास किए गए हैं। और अनेक विद्वानों ने इस बारे में अपने अपने विचार दिए हैं।


प्रेमचंद ने कहानी के बारे में कहा है? 

कहानी एक ऐसी रचना है। जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है।

जैनेंद्र ने यह कहा है ? 

कि कहानी तो एक बुक है ? कहानी तो एक भूख है जो निरंतर समाधान पाने की कोशिश करती है।

कहानी के बारे में ऐसा कहा जा सकता है। कि यह साहित्य की एक गत्यात्मक विधा है। जिसमें जीवन की घटनाओं को इस प्रकार प्रस्तुत किया जाता है। कि पाठक या श्रोता संवेदनशील होता है। और कभी-कभी तो वह स्वयं को उस कहानी का पात्र समझने लगता है। 

अगेय ने कहानी के बारेमे कहा है ?

कहानी जीवन की प्रतीक्षाया है। और जीवन श्याम एक अधूरी कहानी है। एक शिक्ष है जो उम्र भर मिलती है और समाप्त नहीं होती।

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यद्यपि कहानी साहित्य की सबसे प्राचीन विद्या है। पर पिछली दो शताब्दियों में उसके रूप में बहुत अधिक अंतर आ गया है। प्राचीन काल में जो कहानियां लिखी गई और आज जो कहानियां लिखी जा रही है। उस में जमीन आसमान का अंतर आ चुका है। उदाहरण के लिए हम प्राचीन कहानियों में पंचतंत्र या बेताल पच्चीसी की कहानियों को देखें और आधुनिक कहानियों को देखें तो यह अंतर बिल्कुल साफ दिखाई देता है।

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मानव जीवन के किसी एक पहेलु, भावना यह घटना पर कथा के माध्यम से प्रकाश डालना ही कहानी का मूल उद्देश्य रहता है। अब यहां पर सवाल यह होता है कि यही सारे तत्व उपन्यास में भी होते हैं। 

कहानी और उपन्यास में क्या अंतर है? 

दरसल कहानी और उपन्यास के तत्व एक ही होते हैं। पर उपन्यास में जीवन और जगत का जितना विस्तारपूर्वक वर्णन होता है। उतना कहानी में नहीं होता है। यही कारण है कि कहानी का आकार उपन्यास की अपेक्षा काफी संशिप्त होता है और इसे हम एक बैठक में पढ़ सकते हैं। अपनी प्रकृति और गठन में भी उपन्यास से बिल्कुल अलग हो जाती है। आज लोगों का जीवन काफी व्यस्त हो चुका है। लोगों के पास इतना समय नहीं है कि वे काफी समय देकर एक उपन्यास को पड़े इसलिए। उपन्यास की अपेक्षा आज के जीवन में कहानी ज्यादा चर्चित है। लोग कहानियों को पढ़ना ज्यादा पसंद करते हैं। एकता और प्रभाव की तीव्रता ही कहानी कला की मुख्य विशेषताएं है 

कहानी के तत्वों की बात करें।

विषय ग्रस्तु यानी कथानक, पात्र या चरित्र चित्रण, कथोपकथन या संवाद, देशकाल या वातावरण, भाषा एवं शैली, उद्देश्य तथा शीर्षक कहानी के आवश्यक अंग माने गए हैं। यदि इनमें से एक भी चीज कहानी में नहीं है तो वह कहानी की श्रेणी में नहीं आ सकती।

कहानी के कितने भेद किए जा सकते हैं?

अब हम कहानी कला के विभिन्न तत्वों के आधार पर यह जानेंगे की कहानी के कितने भेद किए जा सकते हैं?
तो आप यह जाने की कहानी कला के विभिन्न तत्वों के आधार पर कहानी के समान्ता के चार भेद किए जाते हैं। 1. घटना प्रधान कहानी 
2.चरित्र प्रधान कहानी 
3. वातावरण प्रदान कहानी और 
4. भाव प्रधान 
कहानी प्रतिक वादी या सांकेतिक कहानियों का एक वर्ग और भी किया जा सकता है।

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विषय की दृष्टि से कहानी के सामाजिक, मनोवैज्ञानिक, ऐतिहासिक, वैज्ञानिक, शासित, आदि अनेक भेद किए जा सकते हैं।

types of a story | how to start a story | कहानी क्या है? तो दोस्तों ये थी कहानी के बारे में कुछ जानकारी जिससे आपको यह स्पष्ट हो जाएगा कि कहानी क्या होती है?

कहानी का उद्देश्य क्या होता है? कहानी के तत्व क्या होते हैं और कहानी के कितने भेद किए जा सकते हैं। अंत में कहानियां और उपन्यास के बारे में मैं एक बात और बता दूं की कहानियां और उपन्यास में एक बड़ा अंतर यह होता है कि कहानी अगर एक फूल है। तो उपन्यास फूलों का गुलदस्ता है। मुझे उम्मीद है कि अब कहानी के बारे में आप की जानकारी जरूर पहले से थोड़ी बढ़ गई होगी फिर मिलेंगे 'आभार '

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