Kabristan ka Bhoot | Kahani Hindi mein

आज में बताने जा रहहु Kahani Hindi mein ये कहानी एक बहुत ही पुराना Kabristan ka Bhoot की है। जिसके बारे में सुनते ही लोगों के हाथ-पांव कांपने लगते थे। लोगों का मानना था कि उस जगह भूत मरे हुए लोगों को कब्र में से निकालकर खता है।

Kabristan ka Bhoot - Kahani Hindi mein

Kabristan ka Bhoot | Kahani Hindi mein

Kabristan ka Bhoot: भूत : एक आदमी को खा कर आज तो मजा ही गया बहुत दिन बाद ऐसा खाना मिला है।
इस बात से अनजान रमेश और भूमि शहर से गांव जा रहे थे। अपनी बूढ़ी दादी से मिलने।
रमेश : क्या बात है बड़ी चुप चुप सी बैठी हो?
भूमि : हां क्योंकि मैं बहुत थक गई हूं। हम लोग सुबह से निकले है और रात होने को है। और सुबह से अब तक कुछ खाया पिया भी नहीं।

रमेश : हा यह तो तुमने ठीक कहा। पता नहींरास्ता इतना लंबा क्यों लग रहा है? कहीं ऐसा तो नहीं हम रास्ता भटक गए हो?
तभी उन्हें एक रेस्टोरेंट दिखाई दिया।
भूमि : वो देखो वहां एक रेस्टोरेंट लग रहा है। चलो चल कर कुछ खा लेते हैं।
रमेश : है चलो।

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वे दोनों वहां पर पहुंच जाते हैं। वहां पर उन्हें कुछ अटपटा सा लगा उन्होंने देखा कि एक औरत एक बड़े से बर्तन में कुछ पका रही थी। वह दोनों उसके पास जाते हैं और कुछ खाने के लिए मांगते हैं।
रमेश : अरे सुनिए कुछ खाने के लिए दीजिए। क्या क्या है यहां पर खाने में।

और वह औरत बिना कुछ बोले उनके लिए खाने के लिए कुछ ले आती है। और चली जाती है खाना खाकर वो दोनों चले जाते हैं। और जब उस जगह को दोबारा मुड़कर देखते हैं। तो वहां कुछ नहीं दिखता। वे दोनों घबरा जाते हैं। और तेजी से चलने लगते हैं। और अपनी कार में बैठ जाते हैं।

भूमि : सुनो जी मुझे तो बहुत नींद रही है। तुम गाड़ी चलाओ मैं पीछे की सीट पर जाकर थोड़ा सो जाती हूं।
रमेश : ठीक है जाओ सो जाओ।
वोलो फिर घर पहुंच जाते है।
रमेश : प्रणाम दादी कैसी हैं आप?
दादी : आप रमेश कैसे हो तुम?
रमेश : मैं ठीक हूं दादी।
दादी : बड़े दिन बाद आए हो तुम।

Kabristan ka Bhoot


तभी उसकी पत्नी बिना कुछ कहे रसोई घर में चली जाती है। और कुछ खाने के लिए ढूंढने लगती है।
दादी : अरे ये भूमि को क्या हुआ है? येतो बिना मिले ही सीधे रसोई घर में चली गई?

कुछ ना मिलने पर उसे बहुत गुस्सा जाता है और वह बाहर आती है और चिल्लाने लगती है। और बोलती है अरे बुढ़िया कुछ खाने को नहीं है? कितने दिन हो गए कुछ खाया नहीं है।
और वह सब चीजों को इधर-उधर फेंक ने लगती है। दोनों घबरा जाते हैं और घर से बाहर निकल जाते हैं और दरवाजा बंद कर देते है।

दादी : अरे रमेश भूमि को क्या हो गया?
रमेश : पता नहीं दादी रात को तो ठीक ही थी।
तब रमेश दादी को रात वाली सारी बात बता देता है।
दादी : अरे बेटा यह तुमने क्या कर दिया तुम्हें उस रास्ते से नहीं आना चाहिए था।
रमेश : क्यों दादी माँ ऐसा क्या है उस रस्ते में ? मेतो हर बार उसी रास्ते से आता हूं। पर पहले तो ऐसा कभी नहीं हुआ।

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इधर भूमि खाना खाना करके शोर मचा रही थी। धीरे-धीरे वह भूत में बदल रही थी। और कुछ ही देर में वह पूरी तरह से भूतनी में बदल गई थी। और दरवाजा तोड़कर बाहर जाती है। अचानक रात का सा माहौल हो जाता है। चारों तरफ अंधेरा छा जाता है।
भूतनी : क्यों रे भढिया तूने दरवाजा बंद करके क्या सोचा की में बहार नहीं आपाउंगी। हांहांहां......

दादी : पर तू है कौन? और क्या चाहती है ?
भूतनी : दीखता नहीं में भूतनी हु। मुझे चटपटा खाना बहुत पसंद है। ये तेरा बेटा और बहू मेरे घर आए और मेरा सारा खाना खा गए।  और रमेश को जमीन पर पटक देती है।

दादी : अरे भूतनी छोड़दे मेरे बहु और बेटे को।
भूतनी : बिलकुल नहीं। आज यही मेरा खाना है।
और रमेश को पकड़ कर ले जाती है। और उसके जाते ही फिर से दिन हो जाता है।
दादी : हे भगवान मैं क्या करूं कैसे इस भूतनी से अपने बच्चों को छुड़ाऊ।

इतनेमे एक बाबा कहां से गुजरते हैं। और जैसे ही दादी के घर के सामने गेट के पास आते हैं।
जय भोलेनाथ जय भोलेनाथ ये में क्या देख रहा हूं यहां तो एक भूत की आत्मा है। जो बहुत ही खतरनाक है। और सब कुछ खा जाना चाहती है। चाहे वह इंसान हो या जानवर।
इतने में  दादी भाकर बाबा के पास आती है और रोने लगती है।

दादी : बाबा जी आपने ठीक कहा मेरा बेटा और बहू एक भूतनी के कब्जे में है। उसने मेरी बहू के शरीर को वश में किया है। और मेरे बेटे को अपने साथ ले गई है। मेरी मदद करें बाबा।
बाबा उसकी मदद करने को तैयार हो जाते हैं।
बाबा : ठीक है। में तुम्हारी मदद करूँगा।

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और बाबा दादी को एक लिस्ट देते है। और कहते हैं कि इसमें मैंने कुछ सामान लिख दिया है। तुम ये लेके दिन ढलने से पहले गांव के बाहर वाली कब्रिस्तान के पास जाना और अपने बेटे और बहू की एक चीज ले आना। मैं तुम्हें वहीं मिलूंगा।
दादी : ठीक है बाबाजी जैसा आप कहें।

दिन टहलने वाला ही होता है। दादी जल्दी-जल्दी सारा सामान इकट्ठा करती है। और कब्रिस्तान की तरफ चलने लगती है। इधर बाबा एक पेड़ के पीछे बैठे हवन कुंड के सामने हवन कर रहे होते हैं। दादी उनके पास जाकर सामान दे देती हैं।
और थोड़ी देर में वहा भूतनी जाती है। और बोलती है। वाह क्या खुसबू है। जब खुशबू इतनी मजेदार है तो खाना कितना स्वादिष्ट होगा? हाहाहा ... बढ़िया मेरे लिए खाना लेकर जल्दी मुझे बहुत भूख लगी है। कहा रख्खा है मेरा खाना जल्दी दे मुझे।

दादी : वहां पेड़ के पीछे रखा है पर पहले मेरी बहू और बेटे को छोड़।
भूतनी बुढ़िया को धक्का मार कर पेड़ के पीछे जाती है और देखती है।
अच्छा तोतु मुझे मरने की सोच रही है। ये बाबा कौन है इसके साथ मिल कर तू मुझे मारेगी हुह कितनी नादान हे तू में अपने कब्जे में आई किसी भी चीज को इतनी आसानी से नहीं छोड़ती।

बाबा : क्यों भूतनी तूने मजे क्या समजा है। तेरे जैसी कितनी भूतनी को मैंने पाताल लोक पहुंचा दिया है। फिर तू क्या चीज है?

भूतनी : अच्छा यह बात ले फिर।
और बाबा को उठा लेती और दूर फेंक देती है। बाबा जल्दी से उठ कर सामान की पोटली को हवन कुंड में डाल देते हैं। और भूतनी पोटली को जलता हुआ देखकर हवन कुंड में कूद जाती है। और पवित्र आग में जलने लगती है। और चिल्लाने लगती है अरे बाबा मुझे बाहर निकाल में जल रही हु। में मरना नहीं चाहती निकाल मुझे बहार निकाल।

बाबा : पहले तू रमेश और भूमि को वापस लाओ तभी मैं तुझे बाहर निकाल लूंगा।
भूतनी : ठीक है ठीक है में वापस के आउंगी। पर पहले मुझे यहासे बहार निकल।
दादी : जल्दी करो बाबाजी अगर ये भूतनी जल जाएगी तो मेरी बहु भी उसके साथ जल जाये जाएगी।
बाबा गंगाजल उठा कर हवन कुंड के चारों तरफ डालते हैं। और आग जलना बंद हो जाती है। और भूतनी बाहर निकल जाती है।
भूतनी : हाहाहा। ......  कितना मुर्ख है तू।  मेरा यकीन कर लिया तूने। हाहाहा। ......

Kabristan ka Bhoot


आग में जलने के कारण भूतनी की शक्तिया कम होने लगति है। और वह जमीन पर गिर जाती है। बाबा जल्दी से गंगा जल लाकर उसके ऊपर छिड़क देते हैं। और इतने में भूतनी की आत्मा दुआ बन कर उड़ जाती है। और भूमि वापस जाती है। और उठकर खड़ी हो जाती है। वह भाग कर दादी से गले मिलती है। इतने में रमेश भी भागता हुआ आता है। और दादी उससे पूछती है। बेटा तू कहां चला गया था ?

रमेश : क्या बताऊं दादी उस भूतनी ने मुझे कैद करके रखा हुआ था। पता नहीं अचानक क्या हुआ की मेरी रससि अपने आप खुल गई और मैं भाग आया।

दादी : ये सब बाबाजी की मदद से संभव हुआ है।
सब लोग आपस में गले मिलते हैं। बाबा जी को धन्यवाद देते हैं। और घर की ओर चल पड़ते हैं। भूमि दादी से कहती है पर दादी यह सब हुआ कैसे हमने तो ऐसा कुछ किया नहीं कि कोई भूतनी  हमारे पीछे पड़े।
दादी : रात तुम लोगों ने एक अंजान सी जगह पर खाना खाया था ना वहकोई रेस्टोरंट नहीं था। कब्रिस्तान था 

और तुमने उस भूतनी के हाथ का खाना खाया था ना इसलिए उसने तुम्हें अपना शिकार बनाया।
रमेश : आगेसे ध्यान रखेंगे दादी कभी किसी अनजान जगह नहीं रुकेंगे। और ना ही खाना खाएंगे।

ये Kabristan ka Bhoot | Kahani Hindi mein. किसी लगी हमें कमेंट में जरूर बताये आपका दिन शुभ रहे। 

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