dadimaa ki kahaniya | kahani hindi | खूंखार दानव

dadimaa ki kahaniya  kahani hindi  खूंखार दानव


dadimaa ki kahaniya | kahani hindi | खूंखार दानव 


dadimaa ki kahaniya | kahani hindi | खूंखार दानव - एक गांवमें एक बड़े ही खूंखार दानव ने अपना आतंक फैला रख्खा था। (kahani hindi) वो रातमे जब चाहे गांव में घुस जाता और इंसानो को अपना सीकर बना लेता था। उसकी खौफनाक हरकत से गांव का हरएक इंसान बहोत डरता था। उसके इस आतंक से छुटकारा पाने के लिए सरे गांव वाले इकठ्ठे होते है।

इसीतरह से चलता रहा तो कूच समय बाद गांव वाले यहा रहने के लिए जिन्दा नहीं बहेगा।
हम रोज रोज डरकर नहीं जी सकते उस दानव को मरने के लिए हमें कोइना कोई कदम उठाना ही पड़ेगा।


काफी देर तक बात चित करने के बाद भी गांव वालो के पास कोई समाधान नहीं निकलता। उस विशाल दानव से लड़नेके लिए कोई सामने नहीं आरहा था। दानव की सिर्फ नाम से ही गांव वालो के बिच दहेशत फेल जाती थी। इसलिए उसे टकराने की हिमंत कोभी नहीं जुटापा रहा था। बिना किसी समाधान से ही गांव वाली अपने अपने घर वापस निकल जाते है।
रोज की तरह खूंखार दानव गांव में आता है। उसकी आहट सुनतेही सब अपने अपने घरों के दरवाजे बंद करके चुप जाते है।

dadimaa ki kahaniya दानव : ही हा हा हा .....


 मेरा इतना डर। की गांव वाले छुप के बैठ गए। हु .... पर इन सब को क्या पता की में अपना भोजन केसेना केसे हासिल करहि लूंगा। ही हा हा हा .....

दानव मास के तलाश में गांव चककर लगाता है। तभी उसको इंसानी मास की सुगंध आती है।

हा ... इंसानी मास लगता है की आजका अपना काम हो गया। पेट भरकर भोजन आज तो मिल जायेगा।
इंसान की सुगंध सुंगते सुंगते दानव जंगल की और निकल जाता है। वहा जाकर वो देखता है की एक आदमी पेड़ के निचे सो रहा है। उसे देखकर दानव बहोत खुश होता है। और बोलता है अरे आजतो मजाहि आगया। हा इंसानी मास के लिए आज ज्यादा महेनत नहीं करनी पड़ी।

इतनेमें वो आदमी उठ जाता है। और अपने सामने इतने बड़े विशाल दानव को देखकर वो गभरा जाता है। और बोलता है काया तुम मुझे खाना चाहते हो ?

dadimaa ki kahaniya दानव :  (kahani hindi)


औरक्या तु क्या सोच रहा है। की में तेरी आरती उतरूंगा। ही हा हा हा .....
आदमी : मुझे छोड़ दीजिये मुझे छोड़ दीजिये।
दानव : ऐसे कैसे आजतो तेरा काम तमाम होकर ही रहेंगा।
आदमी को अपनी दादी ने सिखाये गए मंत्र की याद् आती है। जिससे वो किसीकी भी आँखो में जलन उत्पन कर सकता था। तभी उसने मंत्रो की इस्तेमाल के बारेमें सोचा और मंत्र पढ़ना सुरु किया।
हो जाये इस दानव की नसों में हल चल और हल चल से उत्पन हो इसकी आँखो में जलन।

आदमी के मंत्र पढतेहि दानव की आँखो में जलन होने लगती है। और वो जोर जोरसे चिल्ला ने लगता है। उसकी आवाज गांव तक पहोच ती है। और सभी गांव वाले डरते डरते जंगल में जाते है। जब वो सरे वहा पहोचते है तो दानव की बुरी हालत देख वो सब हैरान हो जाते है। इतनेमें वो दानव वहा से दुम दबाकर भाग जाता है।

सभी गांव वाले उस आदमी से पूछते है। की ये तुमने कैसे किया ? dadimaa ki kahaniya (kahani hindi)

और तुम हो कोन ? हम मेसे कभी किसिने इस दानव से पंगा लेनेकी नहीं सोची। लेकिन तुमने इसे चुटकियोमें इसे यहां से भगा दिया।

आदमी : में व्यपार के लिए पाससे के ही गांव से आया हु। में शहर जारहा था। रात बहोत हो गई थी तो मेने सोचा की में थोड़ा यहां आराम करलू। लेकिन ये खूंखार दानव यहां आगया।
गांव वाले : लेकिन तुमने ये सब किया कैसे?
आदमी : मेरी दादी एक तांत्रिक है। उन्होने मुझे अपनी सुरक्षा करने के लिए छोटे मोटे मंत्र सिखाये हुए है। उसकिहि बदौलत आज में जिन्दा हु।
गांव वाले : इस दानव से छुटकारा पानेके लिए क्या तुम हमारी मदद कर सकते हो ? हम लोग बोहत ही परेशान है।
आदमी : में पर में छोटे मोटे ही मंत्र पढ़ सकता हु। पर हा। में अपनी दादी को आपकी मदद करने के लिए यहां लासक्ता हु।


आदमी की बात सुन कर सभी गांव वाले बहोतही खुस होते है। और अगलेही दिन वो आदमी अपनी दादी को गांव में ले आता है।

dadimaa ki kahaniya दादी :


मेने उस दानव के बारेमें सुना उससे छुटकारा पाने के लिए आप सभीको मेरा साथ देना पड़ेगा।
गांव वाले : हा हा हम तुम्हारा पूरा साथ देंगे।
दादी : आप सबको आज रत को मिलकर एक बड़ा यग्न करना पड़ेगा। उस यग्न को करने पर उस दानव की तकते काम हो जाएगी। उसके बाद में संभाल लुंगी।

दादी की बात मानकर सब रातमें यग्न करने की तैंयारी सुरु कर देते है। रात होतेहि खूंखार दानव बदला लेनेके लिए फिर से गांव में आता हैं। सब को एक साथ देख वो बहोत खुश होता है। और सोचता है की आज इन सबका काम तमाम कर दूंगा। दानव को देख सभी डर जाते है। लेकिन वो अपनी पूजा बंद नहीं करके और यग्न करते रहेते है।

दानव : हा हा हा....  क्या बात है आज तुम लोगों को मुजसे डर नहीं लगरहा ? हह कोई नहीं।  जब में एक एक करके तुम लोगों को खाना सुरु करूँगा तब।  तब तुम लोगो को पता चलेगा।

लेकिन जैसे ही दानव उनकी पास आता है। तो उसकी सक्तिया कमजोर पड़ने लगती है। जिसकी वजह से उसका सरीर हिलभी नहीं पाता और वो वही गिर जाता है। ईतनेमे दादी वहा आकर दानव को वहासे चले जानेको कहेति है।

दादी : देख दानव हम तेरा बुरा हाल करेंगे अगर अपनी जान प्यारी है। तो ये गांव छोड़कर चलाजा।
दानव : मै तुम लोगो को छोडूंगा नहीं तुम लोगो से इसका बदला एक एक करके लेकर ही रहूँगा।
दादी : बदला तो तब लेगाना जब तू ज़िंदा बचेग़ा।
दानव : बुढ़िया तू मेरा कूच नहीं बिगाड़ सकती मुझे आज तक कोई हाथ नहीं लगा पाया है। मारना तो बहोत दूरकी बात है।
दादी : मुजे पता है। तेरी जान तेरी नाभी में है। अगर में वहा वार करू तो तू अभिकि अभी भगवान को प्यारा हो जायेगा।

ये बात सुनकर दानव घभरा जाता है।  dadimaa ki kahaniya
लेकिन अपने घमंड में आकर वो गांव छोडनेसे मना कर देता है। ये देखकर दादी को बहोतही गुससा आता है। और वो दानवकी नाभी पर अपने जादुई डंडे से वार कर देती है। दानव वहीं मर जाता है। और इस तरह दानव अपने घमंड में चूर होकर अपनी मौत को खुदही आमंत्रीत कर लेता है।

(kahani hindi)  सिख dadimaa ki kahaniya


तो दोस्तों इस कहानी से हमें यह सिक्षा मिलती है की साथ मिलकर अगर कोई काम किया जाये तो उसमे सफलता जरूर मिलती है। (kahani hindi)  कहानी किसी लगी कमेंट में जरूर बताना 'आभार'
ये कहानी एक मनोरंजन के लिए लिखी गई।
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